जीन पियाजे का संज्ञानात्‍मक विकास का सिध्‍दांत-Jean Piaget's theory of cognitive development

जीन पियाजे का संज्ञानात्‍मक विकास का सिध्‍दांत-Jean Piaget's theory of cognitive development,पियाजे की मानसिक विकास की अवस्‍थाऍ
जैसे कि आप सभी जानते है जीन पियाजे का संज्ञानात्‍मक विकास का सिद्धांत परीक्षा की दृष्टि से अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है और बहुत से बच्‍चो को इससे समझने में कठिनाई होती है और इससे संबंधित प्रश्‍न जो परीक्षा में पूछे जाते है उसे जानने की बहुत इच्‍छा होती है तो आज हम इस पोस्‍ट में उन सभी बातो को जानने वाले है जहॉ से हर बार प्रश्‍न पूछे जाते है ।  




जीन पियाजे का संज्ञानात्‍मक विकास का सिध्‍दांत

आज तक ज्ञानात्‍मक विकास के क्षेत्र जितने शोध एवं अध्‍ययन किये गये है । उनमें सबसे अधिक विस्‍तृत , वैज्ञानिक एवं व्‍यवस्थित अध्‍ययन पियाजे ने किया है यही कारण है कि जीवन पियाजे को मनोविज्ञान के क्षेत्र में तृतीय शक्ति के रूप में जाना जाता है । 

पियाजे के ज्ञानात्‍मक सिद्धांत में ज्ञानात्‍मक प्रक्रिया का अर्थ ज्ञान से नहीबल्कि इसका संबंध मानव बुद्धि से है जो ज्ञान को व्‍यवस्थित एवं संघटित करती है तथा उसका उपयोग करती है । 

पियाजे के अनुसार - ''संज्ञान विकास की अवधारणा , आयु न होकर बालक के द्वारा चाही गई अनुक्रिया तक पहुचने की निश्चित प्रगति है''

 प्रमुख बिन्‍दु

  • स्विरजरलैण्‍ड के निवासी (चिक्तिसक ) संज्ञानात्‍मक विकास ,ज्ञानात्‍मक विकासात्‍मक
  • इन्‍होने अपने बच्‍चों पर प्रयोग किया था 
  • उन्‍होने अवस्‍थाओं में हुये परिर्वन को खोजा इसे अवस्‍था का सिध्‍दांत भी कहते है

जीन पियाजे का संज्ञानात्‍मक विकास का सिध्‍दांतJean Piaget's theory of cognitive development


पियाजे की मानसिक विकास की अवस्‍थाऍ 

जीन पियाजे ने बालको के संज्ञानात्‍मक विकास की व्‍याख्‍या अपने सिद्धांत को चार मुख्‍य अवस्‍थाओ में बॉट कर की है । इन्‍ही अवस्‍थाओं से गुजकर बालक का संज्ञानात्‍मक विकास होता है । 

        ये अवस्‍थाऍं निम्‍निलिखित है । 
      1. संवेदीगात्‍मक अवस्‍था (संवेदी प्रेरक) 0 से 2 वर्ष तक 
      2. पूर्व क्रियात्‍मक अवस्‍था (पूर्वसंक्रियात्‍मक) 2 से 7 वर्ष तक 
      3. मूर्त क्रियात्‍मक अवस्‍था ( मूर्त संक्रियात्‍मक ) 7 से 11 वर्ष तक 
      4. अमूर्त क्रियात्‍मक अवस्‍था (औपचारिक संक्रियात्‍मक ) 11 से 15 वर्ष तक 

संवेदी गामक अवस्‍था (जन्‍म से 2 वर्ष )

    1. इस अवस्‍था को ज्‍वारभाटा का काल भी कहा जाता है 
    2. इस अवस्‍था में बच्‍चा वस्‍तु स्‍थात्वि को प्रदर्शित करता है । 
    3. बालक जो भी कार्य करता है शरीर से इस अवस्‍था में सवेदी समझ होती है 
उदा. आंख कान नाक त्‍वचा
गामक‍ क्रियाये – पकडना, खेलान,लिखनाख्‍ चूमना  

पूर्व संक्रियात्‍मक अवस्‍था- (2से 7 वर्ष )-

    1. इस अवस्‍था में बालक पडोसी बच्‍चों के साथ खेल – खेलता है 
    2. बालक चित्रों का प्रयोग व प्रतीको का प्रयोग करता है 
    3. प्र‍तीकात्‍मक खेल खेलता है
    4. सही अनुपात का अन्‍तर नही कर पाता है 
    5. इस अवस्‍था मे बालक सही प्रकार का चित्र नही बना पता
    6. सजीवता के लक्षण देखने को मिलते है उदा. गुडिया
    7. मूल प्रवृतियों शिशु का व्‍यवहार संचलित होता है 

मूर्त संक्रियात्‍मक अवस्‍था( 7 से 11 वर्ष )

    1. तर्क पर आधारित रहता चिंतन 
    2. चिंतन का समावेश (मूर्त चिंतन)
    3. सही अनुपात का अतंर , आकार, भार, क्रम आदि का समझने लगता है 
    4. इसी अवस्‍था में बालक गणितीय अनेक संक्रियाऍ भी करता है 
    5. नियमीकरण की अवस्‍था भी कहा जाता है 

औपचारिक संक्रियात्‍मक अवस्‍था ( 11 से 15 वर्ष)

    1. इस अवस्‍था में बालक अमूर्त चिंतन करने लगता है यानि – निर्णय ,स्‍मरण ,मनन इत्‍यादि 
    2. वास्‍तविक सदुभवो का काल्‍पनिक परिस्थि‍यो में ढालने की क्षमता का वि‍कास होता है 
    3. बालको में वैज्ञानिक ढ़ंग से सोचने  की क्षमता आ जाती है । 
    4. बालक इस अवस्‍था में अंको का प्रयोग करता है – 
    5. समस्‍या का समाधान करने लगता है 
    6. कार्य कारण को समझता है यानि कार्य मे – अंतर 

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